मुझे कुछ अरज़ करना है, बहुत कुछ सुनना है,
सति के दिल में अब भी वही जुनूँ बसना है...
फिर उसी मोड़ पर, इक बार मिलना है,
जहाँ छोड़ा था वक़्त, वहीं फिर ठहरना है...
आपका दामन थामकर, आपको निखरना है,
दुलारी की आँखों में, सति को ढूँढना है...
बस ख़ामोश बैठना है, आपको तकना है,
देखकर आपको, आप में ही फ़ना होना है...
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, दुलारी...
आज... कल... या आने वाला कोई पल प्यारी...
जीना है, संवरना है, हाथ थामकर कुछ कहना है,
लबों से नहीं, दिल से इज़हार करना है...
देखना है, दिखाना है, वो पल सजाना है,
लाडली को आगोश में लेकर मुस्कुराना है...
तड़प हैं सति, तड़पे हो आप भी,
धड़कन को धड़कन में समाना है अभी...
आपको सब पता है, सति का हाल बेहाल है,
बस एक मुलाक़ात ही अब सवाल है...
मुलाक़ात तो बहाना है, सजनी की नज़रों में झाँकना है,
प्यार का सिलसिला पुराना है, पर अब भी वही अफ़साना है...
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, दुलारी...
आज... कल... या कल...
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