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३० ऑक्टोबर २०२०

आज आप कुछ अलग थी

 



आज आप कुछ अलग थी


आज आप कुछ अलग थी,  

लेकिन मेरे सबसे करीब थी !

आजका दिन आप अलग थी,

लेकिन मेरे बहोत करीब थी !



थोडी शर्माई थी,

थोडी घबराई हुई थी!

हमारेही बारेंमें सोच रही थी, 

बैचेनीमे तनहाईमै,

बार बार आॅखे छुपा रही थी!

आजका दिन आप अलग थी, 

लेकिन मेरे बहोत करीब थी !

 



सोच कुछ रही थी, 

कर कुछ रही थी!

सुनने के लिये मुझे, 

बेकरार भी बहोत थी ! 

लेकिन मुझे टालनेकी भी,

कोशिश कर रही थी !

आजका दिन आप अलग थी, 

लेकिन मेरे बहोत करीब थी !


देख कुछ रही थी, 

सोच कुछ रही थी !

नाते को हमारे,  

बार बार याद कर रही थी !

यादोमें मेरी बेकरार थी, 

बस मेरा ही नाम ले रही थी ! 

आजका दिन आप अलग थी,

लेकिन मेरे बहोत करीब थी !


आपका अलगपन, 

आपका अपनापन, 

आपके लिये बेकरारी, 

यही है जिंदगी हमारी !

आप भी जानते है, 

दुनिया हो आप हमारी !

लेकिन...... 


आजका दिन आप अलग थी, 

लेकिन मेरे बहोत करीब थी !



सती

१० टिप्पण्या:

  1. बहुत बढीया लिखते हो .

    उत्तर द्याहटवा
  2. ही टिप्पणी लेखकाना हलविली आहे.

    उत्तर द्याहटवा
  3. आपकी यह रचना मुझे आज के ही दिन बहुत अलग तथा सुंदर लगी, हृदय से अभिनंदन

    उत्तर द्याहटवा
  4. बहुत खूब!💞 मनमोहक विचारों से हम प्रभावित हुए!!!😊🙏

    उत्तर द्याहटवा
  5. निनावी८:३४:०० AM

    खूप छान 👍

    उत्तर द्याहटवा
  6. निनावी१०:०८:०० AM

    खूप छान.. Kamlichi

    उत्तर द्याहटवा
  7. निनावी१०:१२:०० AM

    खूप खूप सुंदर... विचारांचा सागर!
    अप्रतिम लेखन!!!🩷🫡

    उत्तर द्याहटवा
  8. निनावी१०:१७:०० AM

    Awesome lyrics❤️👌

    उत्तर द्याहटवा

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