मैं खफा़ नहीं हुं,मैं चुप भी नही हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं हारा नहीं हुं, मैं लापता नहीं हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं बेवफा नहीं हुं,मैं कायर नहीं हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं दुःखी नहीं हुं,मैं कष्टि नहीं हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं सरफिरा नहीं हुं,मैं पागल नहीं हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं शायर नहीं हुं,मैं काफिर नही हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं आशिक नहीं हुं,मैं दिवाना नहीं हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं
मैं खफा़ नहीं हुं,मैं चुप भी नही हुं
बस अपनोंमें अपनोंको ढुंढ रहा हुं

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